भारत के 10 सबसे घातक रेल दुर्घटना

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भारत  में  हुवे  रेल  दुर्घटनाओ   ने  बहुत  से  लोगो  की जान  ली  है  जो न  सिर्फ  दुर्भाग्य  की  बात  है  बल्कि ये  एक  चिंता  का  भी  बात  है  क्यूंकि  आज  भारत  के  जादातर  लोग  यात्रा  के  लिए   रेलगारी  का  ही  उपयोग  करते  है | इससे  हमारे  रेल  के  सुरक्षा  पर  भी  सवाल  उठता  है | तो  आइये  जानते  है  भारत  के  10  सबसे  घातक   रेल  दुर्घटना  और  इसका  मुख्या  कारण |

  1. 6 जून 1981 : बिहार  रेल  दुर्घटना  ( 300-800 मौत )

सहरसा  बिहार  के  करीब   एक  पैसेंजर  ट्रेन  बघ्मती  नदी  में  घुस  गयी  थी  जिससे  800 से भी जादा  लोगो  की  मौत  हो  गयी  थी | इसका  कारण  बताया  जाता  है  की  तेज़  बारिस  हो  रही  थी  और  अचानक  रेल  की  पटरी  पर  एक  भैस  आ  जाता  है  जिससे  ड्राईवर ब्रेक  लगाता   है  जिसकी  वजह  से  ट्रेन  नदी  में  घुस  जाती  है |ये  भारत  का  सबसे  बरा  रेल  दुर्घटना है |

 

2. 20  अगस्त  1995 : फिरोजाबाद  रेल  दुर्घटना ( 358 मौत )

फिरोजाबाद ,उत्तर  प्रदेश  में   दिल्ली  के  पुरुसोत्तम  एक्सप्रेस  और  कालिंदी एक्सप्रेस  आपस  में  टकरा  गयी  थी  जिसमे  358 लोगो  से  जादा  की  मौत  हो  गयी |

3. 2 august 1999 : अवध  असम  और  ब्रह्मपुत्र  मेल की  टक्कर ( 268 मौत )

कटिहार  में  हुवे  अवध  असम  एक्सप्रेस  और  ब्रह्मपुत्र  मेल की  टक्कर  से  268  लोगो  की  मौत  हो  गयी  थी तथा  359 लोग  घायल  भी  हुवे  थे |

4. 26 नवंबर 1998: खन्ना रेल  दुर्घटना  (212 मौतें)

जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस ने पंजाब के खन्ना में अमृतसर-सीमावर्ती स्वर्ण मंदिर मेल के तीन डटे हुए बोगियों में घुसते हैं। टूटी हुई रेल की वजह से गोल्डन टेंपल मेल पटरी से उतर गया था और इसी समय जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस 6 पटरी से उतर गए डिब्बों को मारने के पीछे पीछे से आ  जाती  है |

5. 28 मई 2010 – ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस रेलगाड़ी की दुर्घटका  (170 मौतें)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक संदिग्ध हमले में कम से कम 170 लोगों की मौत हो गई, जब मुंबई-हावड़ा कुर्ला लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस पश्चिम मिदनापुर जिले में रात  1:30  बजे खेमसूली और सरदी के बीच विस्फोट (या तोड़फोड़) हुई , और फिर मालगारी  ट्रेन से टक्कर  हुई |

6. 23 दिसंबर 1964 – पम्बान-धनुस्कोदी यात्री ट्रेन (150 मृत्यु)

रामेश्वरम चक्रवात  में पाम्बण-धनुसकोड़ी यात्री ट्रेन को सभी 150 यात्रियों को मारने के कारण बताया  गया  है |

7. 9 सितंबर 2002, हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (140 मृत्यु)

सुबह 10.40 बजे हावरा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, गया और देहरी-ऑन-सोने स्टेशनों के बीच रफीगंज स्टेशन के नजदीक से उतर गई, जिसके परिणामस्वरूप 140 से ज्यादा मृत हुए।

8. 28 सितंबर 1954 – हैदराबाद में दुर्घटना (13 9 मौतें)

हैदराबाद के करीब 75 किलोमीटर दक्षिण में यंशि नदी में एक ट्रेन गिर गई, जब पुल टूट गया। 139 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हो गए |

9. 2 सितंबर 1956 – महबूबनगर के पास (125 मृत्यु)

हैदराबाद से लगभग 100 किलोमीटर दूर जदचेरला और महबूबनेगर के बीच एक ट्रेन के नीचे एक पुल गिर गया। कम से कम 125 मृत, 22 घायल हुवे  |

10. 17 जुलाई 1937- 119 मौतें

कलकत्ता से एक एक्सप्रेस ट्रेन बिहटा स्टेशन के पास एक तटबंध गिर गई, पटना से लगभग 15 मील दूर। कम से कम 119 लोग मारे गए और 180 अन्य घायल हो गए।

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